क्राईम स्टोरी न्यूज़ लखनऊ। प्रदेश में तीन से छह वर्ष के बच्चों के लिए बालवाटिका का नया पाठ्यक्रम लागू किया गया है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार किया गया है। इस पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा के पंचकोश सिद्धांत को बाल विकास के पांच आयामों से जोड़ा गया है। इसके तहत अन्नमय कोष को शारीरिक विकास, प्राणमय कोष को सामाजिक-भावनात्मक एवं नैतिक विकास, मनोमय कोष को भाषा एवं साक्षरता, विज्ञानमय कोष को संज्ञानात्मक विकास और आनंदमय कोष को सौंदर्यबोध विकास से संबद्ध किया गया है।पाठ्यक्रम में खेल, कहानी, संवाद और समूह गतिविधियों के माध्यम से सीखने पर जोर दिया गया है। शारीरिक, भाषा, संज्ञानात्मक, सामाजिक-नैतिक और रचनात्मक विकास के लिए अलग-अलग गतिविधियां शामिल की गई हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, इस आयु वर्ग में विकसित होने वाली क्षमताएं बच्चों के भविष्य की नींव तय करती हैं, इसलिए प्रारंभिक शिक्षा को अनुभव आधारित और समग्र बनाने पर ध्यान दिया गया है।

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