क्राईम स्टोरी न्यूज़ देहरादून। गैस आपूर्ति संकट के बीच शहर में कोयले की ‘तपिश’ बढ़ गई है। सिलिंडर की किल्लत से जूझ रहे लोग अब कोयले और लकड़ी के गुटके का सहारा लेने लगे हैं। ढाबों और चाय की दुकानों से लेकर शैक्षिक संस्थानों के हास्टल व घरों तक में वैकल्पिक ईंधन के रूप में इनका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इन दिनों गुजरात और राजस्थान से आया बबूल का कोयला लगभग 45 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है और मांग लगातार बढ़ती जा रही है। पहले यही कोयला 30 रुपये प्रति किलो बिकता था। विक्रेताओं के अनुसार इस कोयले की खासियत यह है कि इसमें लकड़ी व कोयले से कम धुआं निकलता है और यह देर तक जलता है। यही वजह है कि ढाबा संचालक, फास्ट फूड विक्रेता और चाय की दुकानों के संचालक इसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं। गैस आपूर्ति बाधित होने के कारण कई परिवारों ने भी अस्थायी तौर पर कोयले और लकड़ी के गुटके का इस्तेमाल शुरू कर दिया है दुकानदारों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में कोयले और लकड़ी के गुटके की बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ गई है। शहर के कई इलाकों में गैस मिलने में देरी के कारण वैकल्पिक ईंधन की तलाश में लोग बाजार पहुंच रहे हैं। व्यापारियों के मुताबिक मांग बढ़ने के कारण बाहरी राज्यों से भी कोयले की आपूर्ति मंगाई जा रही है, ताकि बाजार में कमी न हो। शहर के कई ईंधन विक्रेताओं के यहां सुबह से ही लोग कोयला और लकड़ी का गुटका खरीदने पहुंच रहे हैं। दुकानदारों के मुताबिक पिछले एक सप्ताह में बिक्री में अचानक उछाल आया है और रोजाना पहले से कई गुना ज्यादा ग्राहक पहुंच रहे हैं।
