क्राईम स्टोरी न्यूज़ देहरादून। गांवों से हो रहे पलायन पर अंकुश लगाने की दिशा में सरकार गंभीरता से कदम उठा रही है। इस कड़ी में राज्य के 12 जिलों में 50 प्रतिशत से अधिक पलायन वाले 474 गांवों के लिए मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना सीमावर्ती पांच जिलों के चयनित विकासखंडों में मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत 155 योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। दोनों योजनाओं की अनुवीक्षण समिति मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह जानकारी दी गई। मुख्य सचिव ने कहा कि पलायन रोकथाम व सीमांत क्षेत्रों में रोजगार एवं आजीविका से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर रिक्तता न रहे। जिलों से आने वाले प्रस्तावों के अनुमोदन की प्रक्रिया तेज करते हुए तय समयावधि में कार्य पूर्ण कराए जाएं। उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में लक्ष्य आधारित और प्रभावी उपाय अपनाने पर जोर दिया, ताकि अपेक्षित परिणाम प्राप्त हो सकें। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना और मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम संचालित हैं, वे अन्य गांवों के लिए स्वरोजगार व आजीविका के मामलों में प्रेरणादायी माडल बनें, इस लक्ष्य के साथ कार्य किया जाए। इन योजनाओं को तेजी से लागू करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों में उपलब्ध संसाधनों व कमी का वैज्ञानिक अध्ययन कर इसी के अनुरूप योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित कराया जाए। पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डा एसएस नेगी ने कहा कि दोनों योजनाओं का प्रभाव दिख रहा है, लेकिन इनके और बेहतर क्रियान्वयन की आवश्यकता है। ये योजनाएं पलायन प्रभावित गांवों में निवासरत परिवारों, बेरोजगार युवाओं और घर वापसी करने वाले व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए संचालित हैं। सतत आजीविका व स्वरोजगार के स्थानीय संसाधन उपलब्ध कराकर सीमांत क्षेत्रों से पलायन थामने और प्रवासियों की घर वापसी को बढ़ाया दिया जा रहा है।

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